October 26, 2021
जल जंगल ज़मीन

काबुल से महज़ 50 किलोमीटर दूर तालिबान, लोगों को हर पल मौत का इंतज़ार, भूख-प्यास और तबाही

अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का कब्ज़ा बढ़ता ही जा रहा है कई प्रांतों की राजधानियों पर भी तालिबान कब्ज़ा कर चूका है, इसके साथ ही एक और चिंताजनक खबर सामने आयी है। तालिबानियों ने शुक्रवार को देश के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर क़ब्ज़ा कर लिया है। इतना ही नहीं तालिबान लड़ाके काबुल की सीमा से लगी लोगार की प्रांतीय राजधानी फूल-ए-आलम में भी घुस गए हैं।


तालिबान का लोगार पर जीत अफगान हुकूमत की सत्ता को ख़तम करने के लिए एक एहम कदम हो सकता है, क्योंकि लोगार से काबुल तक का सफर केवल दो घंटे में पहुंचा जा सकता है। सिर्फ़ 50 किलोमीटर दूर है, जहां एक ओर तालिबान लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं, काबुल पहुंच रहे शरणार्थियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को तालिबान ने जिस आक्रामकता से अपने अभियान को आगे बढ़ाया, उसके बाद काबुल समेत पूरे अफ़ग़ानिस्तान में अफ़रातफ़री मची हुई है।


शहरों, कस्बों और घरों से भाग रहे हैं लोग-
ज़्यादातर लोगों को ये नहीं पता है कि कल या अगले कुछ घंटों में उनके साथ क्या होने वाला है. लोग अपने शहरों, कस्बों और घरों से भाग रहे हैं ताकि तालिबान लड़ाकों से बच सकें। इन लोगों के लिए राजधानी काबुल वो अंतिम स्थान है जहां उनकी जान बच सकती है. ऐसे में हज़ारों लोगों की भीड़ काबुल पहुंच रही है. संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी देशों से भी अपनी सीमाएं खुली रखने का आग्रह किया है. इसी बीच विश्व खाद्य कार्यक्रम ने एक भारी मानवीय आपदा आने की चेतावनी जारी की है क्योंकि खाद्य सामग्री की भारी किल्लत है।


शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान में हुआ था तालिबान का तांडव-
शुक्रवार को जहां तालिबान विद्रोहियों ने एक और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर नियंत्रण कर लिया वहीं काबुल से महज़ 50 किलोमीटर दूर लोगर की प्रांतीय राजधानी में भी वो घुस गए. उधर ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने चेतावनी दी कि तालिबान के तेज़ी से बढ़ने के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान "गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है." तो अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल ने एक बयान में वहां की स्थिति की तुलना विएतनाम में हुई हार से की।


अमेरिका और ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान के अपने दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या कम करने की घोषणा की है. तो रूस के दूत ने कहा है कि मॉस्को अभी ऐसी किसी योजना पर काम नहीं कर रहा है. वहीं अफ़ग़ानिस्तान के एक एनजीओ ने देश में और अधिक आम लोगों के मरने की आशंका जताई है।


'सड़को पर सोने को मजबूर लोग'
सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक़, अपने घरों से भागकर काबुल में शरण लेने वालों में 72 हज़ार बच्चे शामिल हैं. कुंदुज़ प्रांत से भागकर काबुल पहुंचने वाले स्ट्रीट वेंडर 35 वर्षीय असदुल्लाह ने बीबीसी को बताया कि "हमारे पास रोटी या अपने बच्चे के लिए दवाई ख़रीदने तक के लिए पैसे नहीं हैं."


पीड़ित ने सुनाई आप बीती-
तालिबान लड़ाकों ने असदुल्लाह का घर जला दिया था जिसके बाद उन्हें भागकर काबुल आना पड़ा. वह कहते हैं, "हमारा पूरा घर और सामान जल गया. ऐसे में हम काबुल आए हैं और अल्लाह से मदद की गुहार लगा रहे हैं." काबुल शहर के बाहरी इलाकों में तात्कालिक कैंप बनाए गए हैं, इसके साथ ही खाली पड़े गोदामों में भी कई लोगों के सोने की ख़बरें आई हैं।


कंधार पर जीत के क्या है मायने?
कंधार शहर पर तालिबान के जीन अफ़ग़ानिस्तान के लिए हार की बड़ी बन सकती है, क्युकी अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहरों में से एक है कंधार। छह लाख लोगों की आबादी वाला ये शहर कभी तालिबान का गढ़ हुआ करता है, इसके साथ ही अपने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, कृषि और औद्योगिक उत्पादन के लिहाज़ से भी यह शहर महत्वपूर्ण है। तालिबान लड़ाकों ने नजदीकी शहर लश्कर गाह पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है, इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान की कुल प्रांतीय राजधानियों में से एक तिहाई पर तालिबान लड़ाकों का कब्जा हो गया है।


हर तरफ बस मौत और सन्नाटा-
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, बीते एक महीने में एक हज़ार से ज़्यादा आम लोगों की मौत हुई है. तालिबान ने पिछले कुछ दिनों में मीडिया चीफ़ समेत कई राजनीतिक हत्याओं को भी अंजाम दिया है। अफ़ग़ानिस्तान की एक महिला फ़िल्म मेकर साहरा करीमी ने काबुल में बीबीसी को बताया है कि, ऐसा लग रहा है कि दुनिया ने अफ़ग़ानिस्तान से मुंह मोड़ लिया है। करीमी आशंका जताती हैं कि ये काले, घुप्प अंधेरे से भरे दौर की शुरुआत हो सकती है।


तालिबान से महिलाओं को ज़्यादा खतरा-
तालिबान के इतिहास की बात करे तो नब्बे के दशक में तालिबान सरकार में महिलाओं को पूरा शरीर ढकने वाला बुरका पहनना होता था. दस साल से ज़्यादा उम्र की लड़कियों की पढ़ाई प्रतिबंधित थी और बर्बर सजाएं देने का प्रावधान था जिनमें सार्वजनिक रूप से मृत्यु दंड देना भी शामिल था। इस पर करीमी कहती हैं, "मुझ पर ख़तरा मंडरा रहा है लेकिन अब मैं अपने बारे में नहीं सोचती. मैं अपने देश के बारे में सोचती हूं... मैं अपनी पीढ़ी के बारे सोचती हूं जिसने इन बदलावों को लाने के लिए बहुत कुछ किया है. मैं ख़ूबसूरत बच्चियों के बारे में सोचती हूं. इस देश में हज़ारों खूबसूरत, युवा और काबिल महिलाएं हैं."


लड़कियों के लिए काम करने वाली एक निदेशक का कहना है-
कंधार पर तालिबान के क़ब्ज़े से ठीक पहले अफ़ग़ानी लड़कियों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ की कार्यकारी निदेशक पश्ताना दुर्रानी कहती है कि, वह अपनी ज़िंदगी पर मंडरा रहे ख़तरे की वजह से डरी हुई हैं क्योंकि वह महिलाओं की शिक्षा को लेकर काफ़ी मुखर रही हैं. वह कहती हैं, "हमारे साथ जो लड़कियां थीं वह पहले ही भाग गयी हैं. मुझे नहीं पता कि अब मेरी छात्राएं कहां हैं. मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी ज़िंदगियों को लेकर डरी हुई हूं. अगर उनकी शादी किसी तालिबान लड़ाके से हो गयी तो क्या होगा. उनकी ज़िंदगी का हश्र क्या होगा?"


घर छोड़ भागे लोगों का कहना है-
शुक्रवार को अपना घर छोड़कर भागने वाली दुर्रानी कहती हैं, "मैं आज सुबह ही अपना घर खो चुकी हूं. मैं वो सब कुछ खो चुकी हूं जो मेरे पिता ने मेरे लिए छोड़ा था- उनकी विरासत, ज़मीन, किताबें और यादें. अब खोने के लिए क्या बचा है." दुर्रानी अफ़ग़ान सरकार पर मुल्क और अवाम का सौदा करने का आरोप लगाती हैं. वे पूछती हैं, "वह क्या कर रहे थे? सब कुछ इतनी आसानी से तबाह कैसे हो सकता है?" लेकिन दुर्रानी ये भी कहती है कि पश्चिमी देशों ने अफ़ग़ान सरकार को अफ़ग़ानी लोगों से ज़्यादा महत्व देकर लोगों को निराश किया है. वह कहती हैं, "अफ़ग़ानिस्तान में शामिल सभी लोगों और नेतृत्व इसके लिए ज़िम्मेदार है. मुझमें अब कोई उम्मीद शेष नहीं है."

Story Origin : अफ़ग़ानिस्तान

Comments

Leave a comment

HEADLINES

Lakhimpur Kheri violence : कांग्रेस ने 4 किसान, 1 पत्रकार के परिजनों को दी 1 करोड़ की मदद | UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 8 नवंबर तक बढ़ी | UP: योगी सरकार अब माफियाओं से खाली कराई गई जमीन पर बनाएगी सस्ते घर, गरीबों और कर्मचारियों को मिलेगा लाभ | Gorakhpur : नशे में धुत दबंगों ने पुलिसकर्मी को लाठी-डंडों से पीटा | Kisan Andolan: योगेंद्र यादव के निलंबन पर राकेश टिकैत की दो टूक, बोले- 40 लोगों की कमेटी का फैसला सही | हरियाणा: पतंजलि गोदाम में काम करने के बाद घर लौट रहे 3 युवकों की सड़क हादसे में मौत | UP Assembly Elections: यूपी चुनाव को लेकर कांग्रेस की अहम बैठक आज, महिला उम्मीदवारों को दी जाएगी प्राथमिकता | बॉलीवुड एक्ट्रेस मीनू मुमताज का कनाडा में निधन, मीना कुमारी ने रखा था इनका नाम | हिमाचल में फिर बढ़े दाम, शिमला में 105 रुपये के करीब पहुंचा पेट्रोल | 14 साल के लड़के को मिला 100 साल पुराना लव लेटर, लिखा था- 'चुपके से आधी रात में आना मिलने' | लहंगे में छुपाकर ऑस्‍ट्रेलिया भेजी जा रही थी सुडोफेड्रीन ड्रग्‍स, NCB ने पकड़ा | COVID-19 in India: 24 घंटे में कोरोना के 16326 नए मामले, केरल ने मौत के आंकड़े जोड़े तो बढ़ी धड़कन | ICC T20 WC: भारत पाकिस्तान मैच पर लगा 1000 करोड़ रुपये का सट्टा, एंटी करप्शन यूनिट मुस्तैद | बच्चों की कोरोना वैक्सीन पर अदार पूनावाला बोले- हम जल्दबाजी नहीं करेंगे | NCB की रडार पर 'प्रसिद्ध हस्ती' का नौकर, अनन्या पांडे के कहने पर आर्यन खान तक ड्रग्स पहुंचाने का शक |