October 26, 2021
जल जंगल ज़मीन

उत्तराखंड में आयी आपदा पर पर्यावरणविद रवि चोपड़ा ने किया बड़ा खुलासा, जानिए क्या बोले रवि चोपड़ा

नई दिल्‍ली: उत्‍तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से आयी आपदा में 100 लोगो ने अपनी ज़िन्दगी गवा दी। जिसके बाद, इस उत्‍तराखंड स्थित पर्यावरणविद और 2013 में विनाशकारी केदारनाथ आपदा के बाद सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के अध्‍यक्ष डॉ. रवि चोपड़ा ने बड़ा खुलासा किया जिसमे उन्होंने कहाँ कि, 2013 की महाप्रलय के बाद सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में उन्‍होंने आपदाओं को लेकर आगाह किया था। उन्‍होंने उत्‍तराखंड की नदियों पर बनाए जा रहे बांधों को तत्‍काल रद्द करने की संस्‍तुति की थी। साथ ही आगाह किया था कि, अगर बांध बनते रहे तो आपदाएं आती रहेंगी।


आप को बता दे कि, डॉ. रवि चोपड़ा ने न्यूज़ एजेंसीयों से बार करते हुए उन्होंने, चमोली हादसे को लेकर भी अहम जानकारियां दी थी जिसमे उन्होंने कहा है कि, 2013 की घटना के बाद अगर सुप्रीम कोर्ट में दी गई रिपोर्ट पर काम हुआ होता और उत्‍तराखंड सरकार ने कदम उठाए होते तो चमोली, जोशीमठ, तपोवन में हुए इस हादसे से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि, केदारनाथ आपदा के बाद कमेटी गठित करके सुप्रीम कोर्ट ने तीन सवालों के जवाब मांगे थे।


आपदा के बाद उन्होंने किये इन बड़े सवालो के तालाब-
जिसमे उनका पहला सवाल था, क्‍या बांधों के निर्माण के कारण उत्‍तराखंड राज्‍य में नुकसान हुआ है ? तब शोध के बाद कमेटी की ये राय थी कि हां, बांधों से कई पर्यावरणीय नुकसान हुए हैं। इस दौरान कमेटी ने सबूतों के साथ ब्‍यौरा दिया। 


साथं ही दूसरा सवाल था कि, क्‍या उत्‍तराखंड के बांधों की वजह से बाढ़ आई है, उसका नुकसान बड़ा है या नहीं ? हमने चार बांधों का अध्‍यययन करके यह सिद्ध किया कि बांधों की वजह से नुकसान बढ़ा है। बांध न होते तो इतनी क्षति न होती। ये चार बांध थे मंदाकिनी नदी पर बना फाटा ब्‍यूंग, मंदाकिनी नदी पर ही बना सिंघोली भटवारी, अलकनंदा पर विष्‍णुप्रयाग प्रोजेक्‍ट और अलकनंदा पर ही हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट। 


तीसरा सवाल यह था कि, वाइल्‍ड लाइफ इंस्‍टीट्यूट ने 2012 में संस्‍तुति की थी कि 24 बांध को अलकनंदा और भागीरथी बेसिन में रद्द कर दिया जाए। कोर्ट ने हमसे कहा कि, आप इसका अध्‍ययन करके बताएं कि क्‍या करना चाहिए। तब  हमने अध्‍ययन किया जो हमारी संस्‍तुति थी कि 23 बांध तो पूरी तरह रद्द कर देने चाहिए जबकि एक बांध के डिजाइन में भारी संशोधन की जरूरत है।


ग्‍लेशियर फटा है या नहीं, क्‍या है सच्‍चाई-

डॉ. रवि चोपड़ा ने शोध में पाई कुछ महत्पूर्ण जानकारी-
उन्होंने रिसर्च करने का भी किया था ज़िक्र जिसमे उन्होंने कहा, हमारे शोध से जो नई और महत्‍वपूर्ण बात निकली वह यह थी कि उच्‍च हिमालयी क्षेत्र में जहां पर घाटियों का तल 2000 मीटर से नीचे है। जैसे जोशीमठ के आगे वाला हिस्‍सा, उन घाटियों में जिन्‍हें हम पैरा ग्‍लेशियर जोन कहते हैं। ये वे इलाके हैं जहां पर ग्‍लेशियर पीछे हटे थे और हटते समय भारी मलबा, चट्टानें, बड़े-बड़े पत्‍थर छोड़ गए थे। जब भी इन इलाकों में भारी वर्षा होती है, बाढ़ आती है तो वो छोटी-छोटी नदियां जैसे ये रिषीगंगा थी, सब मलबे को उठाती हैं और नीचे चलती हैं।


बाढ़ के रास्‍ते में अगर कोई रुकावट आती है तो वे उस रुकावट को नष्‍ट कर देती हैं। जैसे ही ये आगे बढ़ती हैं तो और शक्तिशाली हो जाती हैं और रुकावटों को तोड़ती जाती हैं। ये तब तक चलता है जब तक कि नदी का तल घट न जाए। यही चीज आपने चमोली में हाल ही में हुए हादसे में देखी है। ये बांध नहीं बनने चाहिए थे।


ग्‍लेशियर फटा है या नहीं, क्‍या है सच्‍चाई-
डॉ. चोपड़ा ने ग्लेशियर फटने के संदर्ब में कहा कि, इसी सवाल पर काम चल रहा है। यह कहना कि ग्‍लेशियर फटा है या बादल फटा है, यह कहना इतना आसान नहीं है। इसको लेकर शोध चल रहा है। हालांकि, अभी तक जो जानकारी आई है उसके अनुसार या तो ग्‍लेशियर का कोई हिस्‍सा टूटा है ऐसी संभावना दिखाई दे रही है।


हालांकि, ग्‍लेशियर लेक की दीवार नहीं टूटी है, या फिर पिछले एक हफ्ते में यहां बर्फ पड़ी थी और बर्फ पिघली क्‍योंकि 5 और 6 को आसमान साफ हो गया था। ऐसे इलाकों में धूप भी तेज पड़ती है। ऐसे में जैसे ही स्‍नो मेल्टिंग हुई और पानी नीचे खिसकना शुरू करता है तो वह एक एवलांच का रूप लेता है। ऐसे में दो संभावनाएं हैं।


जब तक कोर्ट पर्यावरण का संज्ञान नहीं लेंगे तब तक कठिन है कि सरकार अपने बल पर कुछ कर दे: रवि चोपड़ा-
रवि चोपड़ा का कहना है कि, देखिए 2013 की आपदा तो इस आपदा से काफी भयंकर थी। जनहानि और मालहानि कई गुना ज्‍यादा थी लेकिन जब सरकार ने उस आपदा के बाद ही कोई खास कदम नहीं उठाया तो इसके बाद सरकार कोई सकारात्‍मक कदम उठाएगी ऐसी मुझे आशा नहीं है। बहुत जरूरी है कि, जब तक समाज एकजुट होकर सरकार के ऊपर दवाब नहीं डालेगा, जब तक कोर्ट पर्यावरण का संज्ञान नहीं लेंगे तब तक कठिन है कि सरकार अपने बल पर कुछ कर दे। 

Story Origin : नई दिल्ली

Comments

Leave a comment

HEADLINES

Lakhimpur Kheri violence : कांग्रेस ने 4 किसान, 1 पत्रकार के परिजनों को दी 1 करोड़ की मदद | UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 8 नवंबर तक बढ़ी | UP: योगी सरकार अब माफियाओं से खाली कराई गई जमीन पर बनाएगी सस्ते घर, गरीबों और कर्मचारियों को मिलेगा लाभ | Gorakhpur : नशे में धुत दबंगों ने पुलिसकर्मी को लाठी-डंडों से पीटा | Kisan Andolan: योगेंद्र यादव के निलंबन पर राकेश टिकैत की दो टूक, बोले- 40 लोगों की कमेटी का फैसला सही | हरियाणा: पतंजलि गोदाम में काम करने के बाद घर लौट रहे 3 युवकों की सड़क हादसे में मौत | UP Assembly Elections: यूपी चुनाव को लेकर कांग्रेस की अहम बैठक आज, महिला उम्मीदवारों को दी जाएगी प्राथमिकता | बॉलीवुड एक्ट्रेस मीनू मुमताज का कनाडा में निधन, मीना कुमारी ने रखा था इनका नाम | हिमाचल में फिर बढ़े दाम, शिमला में 105 रुपये के करीब पहुंचा पेट्रोल | 14 साल के लड़के को मिला 100 साल पुराना लव लेटर, लिखा था- 'चुपके से आधी रात में आना मिलने' | लहंगे में छुपाकर ऑस्‍ट्रेलिया भेजी जा रही थी सुडोफेड्रीन ड्रग्‍स, NCB ने पकड़ा | COVID-19 in India: 24 घंटे में कोरोना के 16326 नए मामले, केरल ने मौत के आंकड़े जोड़े तो बढ़ी धड़कन | ICC T20 WC: भारत पाकिस्तान मैच पर लगा 1000 करोड़ रुपये का सट्टा, एंटी करप्शन यूनिट मुस्तैद | बच्चों की कोरोना वैक्सीन पर अदार पूनावाला बोले- हम जल्दबाजी नहीं करेंगे | NCB की रडार पर 'प्रसिद्ध हस्ती' का नौकर, अनन्या पांडे के कहने पर आर्यन खान तक ड्रग्स पहुंचाने का शक |