October 26, 2021
जल जंगल ज़मीन

एक ऐसा किसान नेता जिसकी एक हुंकार पर लाखों किसान दिल्ली की ईंट से ईंट बजा दिया करते थे

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और  देश के जाने माने  कवि हैं।  

  • किसानों के सर्वमान्य नेता थे चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत
  • चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की किसान पंचायत में कवि हरिओम पवार अपने गीत सुनाते थे और हरियाणा की महिला गायक गाना गाती थीं।

 

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत, 25 वर्षों तक उत्तर प्रदेश के किसानों के सर्वमान्य नेता रहे। केंद्र में राजीव गांधी सरकार से लेकर पी वी नरसिंह राव और मनमोहन सिंह की सरकार से वह अपनी मांगें मनवाने में सफल रहे। उत्तर प्रदेश में वीर बहादुर सिंह, मुलायम सिंह यादव, सुश्री मायावती, राजनाथ सिंह और राम प्रकाश गुप्ता की सरकारों के आगे वह अडिग खड़े रहे। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने जब उनकी एक टिप्पणी से आहत होकर उनकी गिरफ्तारी के लिए पूरे प्रदेश की फोर्स उनके गांव में लगा दी थी तब भी महेंद्र सिंह टिकैत तनिक नहीं डिगे,नहीं झुके।

महेंद्र सिंह टिकैत शुद्ध किसान नेता थे। अपने आखिरी दिनों में उन्होंने भारतीय किसान मजदूर पार्टी भी बनाई थी और चुनाव भी लड़ा पर सफल नहीं हुए। किंतु उत्तर प्रदेश के गांव गांव में उनकी लोकप्रियता कायम रही। 15 मई 2011 मैं जब उनकी मौत हुई तब तक वह किसानों के अकेले ऐसे नेता थे जिनकी एक पुकार पर लाखों किसान जान देने के लिए चले आते थे। उनका नारा था बात करोगे बात करेंगे नहीं तो जूता लात करेंगे।। घेरा डालो डेरा डालो के तहत जहां किसान पंचायत शुरू हो जाती थी चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का हुक्का सुलगा दिया जाता था और टिकैत हुक्का गुड गुड देखे जा सकते थे।

उन्होंने भारतीय किसान यूनियन बनाई और किसानों को हरा झंडा हरी सफेद टोपी और हरे बिल्ले प्रदान किए जिसमें भारतीय किसान यूनियन लिखा होता था। महेंद्र सिंह टिकैत ऐसे किसान नेता थे जिनकी किसान पंचायत में खुद सरकार आती थी। एक बार भारत के प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव से उन्होंने सीधे पूछ लिया था कि क्या आपने हर्षद मेहता से 1करोड़ रुपए की घूस ली है।

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के शामली तहसील के सिसौली गांव में 6 अक्टूबर 1935 को हुआ था। उनके पिता का नाम चौहल सिंह टिकैत और माता का नाम मुख्ट्यारी देवी था। जब टिकैत 8 साल के थे तभी उनके पिता की मौत हो गई थी। और उन्हें खाप पंचायत का चौधरी बनना पड़ा।

सन 1986 में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और वीर बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। किसानों पर सरकार ने जबरदस्त बिजली बिल बड़ा दिया तो टिकैत ने शामली तहसील जिला मुजफ्फरनगर में धरना प्रदर्शन शुरू किया। इसी धरना प्रदर्शन के दौरान किसानों पर पुलिस ने गोली चलाई जिसमें 2 किसान और एक पीएसी के जवान शहीद हो गया। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की ताकत पहचानी और शामली में किसान पंचायत में जाकर किसानों से माफी मांगी और उनकी सारी मांगे मान ली। इसी आंदोलन से चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत रातों-रात किसानों को नेता बन गए।

एक समय चौधरी चरण सिंह किसानों के नेता कहे जाते थे पर महेंद्र सिंह टिकैत के आने के बाद टिकैत ही किसानों के नेता हो गए।

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को बाबा टिकैत और फिर महात्मा टिकैत किसान कहने लगे थे। भारतीय किसान यूनियन का उन्होंने विस्तार किया और उत्तर प्रदेश हरियाणा राजस्थान तक उनके संगठन में लाखों लोग जुड़े। कभी बाबा जयगुरुदेव की सभा में लाखों लाख की भीड़ होती थी उसी तरह चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की एक आवाज पर लाखों किसान इकट्ठा हो जाता था। उन्होंने किसानों को लाठी पटा बनेथी चलाने का प्रशिक्षण भी दिलवाया।

यह चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का ही प्रभाव था कि भारत में बहूराष्ट्रीय कंपनियां उस तरह नहीं घुस पाई जिस तरह वह घुसना चाहती थीं।

सन 1988 में टिकैत ने दिल्ली के बोट क्लब में हजारों किसानों के साथ धरना दिया था। और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार से अपनी सारी मांगे मनवा ली थीं।

एक बार कानपुर में किसान आंदोलन के दौरान जब कानपुर के तत्कालीन डीएम दिनेश सिंह ने किसानों पर सख्ती की तो टिकैत कानपुर आए। डीएम दिनेश सिंह ने उन्हें कानपुर नगर में नहीं घुसने दिया और नौबस्ता मंडी में उनको रोक दिया गया। यह टिकैत का ही जज्बा था कि जिला प्रशासन की लाख नाकाबंदी के बावजूद चौधरी टिकैत किसानों के साथ कानपुर कलेक्ट्रेट डी एम ऑफिस तक घुस गए और अपनी समस्याएं अपना मांग पत्र देकर ही लौटे। लाठियां खाई पर अडिग रहे।

लखनऊ प्रदर्शन के दौरान चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और उनके किसान पंचायत के किसानों पर मुलायम सिंह सरकार ने लाठियां चलवा दी थीं। पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत नहीं डिगे। सरकार को उनकी बातें माननी पडी।

लखनऊ प्रदर्शन के दौरान उनकी पत्नी बलजोरी देवी भी घायल हुई थीं।

उत्तर प्रदेश में जब मायावती मुख्यमंत्री थीं तो किसानों को कोई अहमियत नहीं मिल रही थी। खिसिया कर टिकैत ने मायावती पर टिप्पणी कर दी। नाराज मायावती ने तिक्सित्व पर मुकदमा लिखवा दिया और उनके गिरफ्तारी के लिए भारी फोर्स उनके गांव में भेज दी पर टिकैत को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। आखिर मायावती को ही झुकना पड़ा।

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ऐसे नेता थे जिन की मान्यता भारत भर में हो गई थी। विदेशी मीडिया भी उनकी कवरेज के लिए आता था पर अंग्रेजी के अखबार हरदम उन पर छींटाकशी करते थे इससे वह नाराज रहते थे। उनकी एक आवाज पर लाखों किसान लाठी डंडा लेकर ट्रेन बसों में बैठकर बुलाए गए स्थल पर आ जाते थे। बाबा टिकैतकिसान महापंचायत करते थे। भ्रष्ट अफसरों के दफ्तरों के बाहर उनका आंदोलन होता था घेरा डालो डेरा डालो। वहीं पंचायत लग जाती थी। खाना पीना लंगर वही शुरू हो जाता था। हुक्का सज जाता था। किसान पैदल रेल बस या अपनी ट्रैक्टर ट्रालीयों से आ जाते थे।

उत्तर प्रदेश में चाहे वीर बहादुर सिंह के सरकार हो मुलायम सिंह की सरकार हो मायावती की सरकार हो राजनाथ सिंह की सरकार हो या राम प्रकाश गुप्ता की सरकार रही हो चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत किसी से नहीं डरे पीछे नहीं हटे और अपनी मां गें मनवा कर ही रहे। तमाम प्रधानमंत्रियों मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं से उनकी दोस्ती थी किंतु किसान हितों से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। किसान हित ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म था कर्म था और उद्देश्य था वह किसान को खुशहाल देखना चाहते थे। किसानों की कर्ज माफी उन्हीं के प्रयास से शुरू हुई।

आज किसान आंदोलन जगह जगह दिखाई देते हैं उग्रता भी मिलती है। पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत एक मिसाल कायम कर गए हैं। उनके गांव सिसौली में किसान भवन में उनके नाम की अखंड मशाल जलती रही है। उनके बेटे राकेश टिकैत ही किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं।

आज देश को महात्मा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जैसे एक किसान नेता की तलाश है।

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